तीसरे स्तर की जरूरत क्यों पड़ती है?
महादशा कई साल चल सकती है और अंतरदशा भी लंबी हो सकती है। प्रत्यंतरदशा उसी संदर्भ के भीतर अधिक छोटी अवधि दिखाती है, इसलिए इसे अकेले नहीं पढ़ना चाहिए।
Kya Kare में डेटा का स्रोत
Kya Kare प्रदाता से मिली समय सीमाओं को सहेजता है। यदि किसी प्रदाता में गहरे स्तर सीधे उपलब्ध न हों, तो प्रदाता से मिली मूल सीमा को आधार बनाकर मानक विंशोत्तरी अनुपात से आगे की गणना की जा सकती है।
इसके बाद कौन-से स्तर आते हैं?
प्रत्यंतरदशा के बाद सूक्ष्म और प्राण दशा आती हैं। समय छोटा होता जाता है, इसलिए जन्म समय की सटीकता और व्याख्या में सावधानी और महत्वपूर्ण हो जाती है।
ज्योतिष को संदर्भ की तरह उपयोग करें, निश्चितता की तरह नहीं
ज्योतिष व्याख्यात्मक है। कोई चार्ट या दशा किसी खास जीवन घटना की गारंटी नहीं देती। महत्वपूर्ण निर्णयों में वास्तविक जानकारी और उचित पेशेवर सलाह भी शामिल करें।
