वैदिक ज्योतिष गाइड

नौ ग्रहों की महादशा के फल: सूर्य से केतु तक

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु महादशा के पारंपरिक अर्थ जानें।

सूर्य, चंद्र और मंगल का समय

सूर्य को अधिकार और पहचान, चंद्र को मन और परिवार, मंगल को ऊर्जा व पहल से जोड़ा जाता है। वास्तविक व्याख्या भाव, राशि और अन्य ग्रह संबंध देखकर होती है।

बुध, गुरु और शुक्र का समय

बुध संचार व विश्लेषण, गुरु ज्ञान व मार्गदर्शन, शुक्र संबंध व कला से जुड़ा माना जाता है। शुभ ग्रह की दशा हमेशा शुभ होगी, यह निश्चित नहीं।

शनि, राहु और केतु का समय

शनि जिम्मेदारी, राहु असामान्य इच्छाओं और केतु विरक्ति का प्रतीक हैं। इन्हें हर कुंडली में केवल अशुभ कहना सही नहीं।

एक ही ग्रह के फल अलग क्यों?

ग्रह का भाव स्वामित्व, राशि, दृष्टि, अंतरदशा और गोचर साथ देखकर अर्थ लगाया जाता है। पहले सही दशा अवधि जानें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरी महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा कब शुरू और खत्म होगी?

विंशोत्तरी दशा की गणना जन्म के चंद्र नक्षत्र से होती है। जन्म तिथि, सही समय, स्थान और अयनांश से महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा, सूक्ष्म और प्राण दशा की तारीखें निकालें।

क्या शनि, राहु और केतु की दशा हमेशा खराब होती है?

नहीं। ग्रह का भाव, राशि, दृष्टि, युति और चल रही उपदशा साथ में देखी जाती है। किसी ग्रह का नाम सुनकर निश्चित बुरे परिणाम मानना सही नहीं है।

ज्योतिष को संदर्भ की तरह उपयोग करें, निश्चितता की तरह नहीं

ज्योतिष व्याख्यात्मक है। कोई चार्ट या दशा किसी खास जीवन घटना की गारंटी नहीं देती। महत्वपूर्ण निर्णयों में वास्तविक जानकारी और उचित पेशेवर सलाह भी शामिल करें।

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