लग्न क्या है और भाव कैसे गिने जाते हैं?
जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि लग्न कहलाती है। उसी के आधार पर भावों का क्रम समझा जाता है। केवल चंद्र राशि से करियर भाव तय नहीं होता।
पहले से छठे भाव का अर्थ
पहला स्वयं, दूसरा परिवार व धन, तीसरा प्रयास व संचार, चौथा घर, पाँचवाँ शिक्षा व रचनात्मकता, छठा सेवा व चुनौतियों से जुड़ा माना जाता है।
सातवें से बारहवें भाव का अर्थ
सातवाँ साझेदारी, आठवाँ परिवर्तन, नौवाँ ज्ञान व विश्वास, दसवाँ करियर, ग्यारहवाँ लाभ और बारहवाँ खर्च व एकांत। भाव स्वामी की स्थिति भी देखें।
खाली भाव क्या अशुभ होता है?
नहीं। भाव की राशि, स्वामी, उसकी स्थिति, दृष्टि और चल रही दशा देखें। ग्रह न होना असफलता का प्रमाण नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जन्म कुंडली कैसे पढ़ें और लग्न क्या होता है?
पहले लग्न, फिर 12 भाव, ग्रहों की राशि, भावेश, दृष्टि और चंद्र नक्षत्र देखें। जन्म का सही समय आवश्यक है क्योंकि लग्न और भाव बदल सकते हैं।
कुंडली के 12 भाव क्या बताते हैं?
पहला भाव स्वयं, दूसरा धन, तीसरा प्रयास, चौथा घर, पाँचवाँ शिक्षा, छठा सेवा, सातवाँ विवाह, आठवाँ परिवर्तन, नौवाँ भाग्य, दसवाँ करियर, ग्यारहवाँ लाभ और बारहवाँ खर्च से जुड़ा माना जाता है।
ज्योतिष को संदर्भ की तरह उपयोग करें, निश्चितता की तरह नहीं
ज्योतिष व्याख्यात्मक है। कोई चार्ट या दशा किसी खास जीवन घटना की गारंटी नहीं देती। महत्वपूर्ण निर्णयों में वास्तविक जानकारी और उचित पेशेवर सलाह भी शामिल करें।
